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अक्सर खाली मन पे ....

Posted On: 1 Sep, 2016 कविता,Junction Forum में

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यादों के पिटारे में कैद हैं
कई सुंदर नजारे
कुछ खिलखिलाते
कुछ रुलाते
कुछ सम्भलना सिखाते हैं
अक्सर खाली मन पे
जब तब आके
अपना डेरा जमाते हैं .
*

आती जाती लहरों में
यादों की ,
मैं खो जाती
अवशेष
खोजने लगती
कुछ मुट्ठी भर आते
कुछ यूँ फिसल जाते
*

यादों के समुंदर में
कुछ आती लहरों में
सीप की ज्यँ मोती ,
कुछ गायब हो जाती
वापस जाती लहरों में
निशांं छोड़ के रेत में
*

मीनाक्षी श्रीवास्तव

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1 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Jitendra Mathur के द्वारा
September 6, 2016

बहुत सुंदर और भावपूर्ण अभिव्यक्ति है यह आपकी मीनाक्षी जी ।


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