KALAM KA KAMAL

Just another weblog

156 Posts

1020 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 4431 postid : 1236925

कोई उनसे पूछे ...

Posted On: 28 Aug, 2016 कविता,Junction Forum में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

अति सर्वत्र वर्जयते‘  देखा जाय तो यह सूत्र हरदम उचित साबित होता है। चाहे व्यक्तिगत हो ,सामाजिक हो अथवा प्राकृतिक परिपेक्ष्य हो ।

आजकल कई क्षेत्र बाढ़ के प्रकोप से ग्रसित हैं … सचमुच दृश्य देखकर जी दहल जाता है ।

उनके दुःख दर्द को क्या हम शब्दों में बयां कर पाएंगे … ? शायद .. नहीं… .कदापि … नहीं ….

*

कोई उनसे पूछे ?
कैसे बिखरा ?
आशियां उनका
मिलकर ,
सजाया था
तिनका तिनका
बिनकर .

*

हाय !
अब क्या संवर पायेगा ?
साधन सामान ,
शायद फिर भी ,
पर क्या ?
जो बिछड़े फिर मिल सकेंगे ?
काश !

*

हे प्रभु !
किस कसूर की मिली सजा ?
वे थे बेक़सूर ..
कसूरवार और कोई
लगता है उनका शायद सगा
करना उनको क्षमा
बंदे हैं तेरे, करना दया
हे मालिक !
——

मीनाक्षी श्रीवास्तव

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 3.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

2 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
August 31, 2016

प्रिय मीनाक्षी जी कोई उनसे पूछे ? कैसे बिखरा ? आशियां उनका मिलकर , सजाया था तिनका तिनका बिनकर .कितना दुखद है लेकिन आपने उनके दुःख को अपनी पंक्तियों में सजीव कर दिया पाठकों से जोड़ दिया

Jitendra Mathur के द्वारा
August 31, 2016

मैं आपकी अभिव्यक्ति में अंतर्निहित भावनाओं को अनुभव कर सकता हूँ आदरणीया मीनाक्षी जी ।


topic of the week



latest from jagran