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मधुमास ...

Posted On: 10 Feb, 2016 कविता,Junction Forum में

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मधुमास

-*-*-*-

मधुमास ने   रचा   नज़ारा
जन मानस को लगे जो प्यारा

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रंग-बिरंगे कलि पुष्प गुच्छादि
गुंजार – गुंजन  मधुप – रसादि
**
मंडराती  रंगीन –  तितलिया
पियु की टेर कूकती कोयलिया

**
मस्त झोंके  मलय – बयार  के
संकेत नवल  सृजन का  करते

**

मीनाक्षी श्रीवास्तव

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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Jitendra Mathur के द्वारा
February 17, 2016

छोटी लेकिन बहुत सुंदर कविता है आपकी मीनक्षी जी ।

    meenakshi के द्वारा
    August 19, 2016

    जीतेन्द्र माथुर जी शुक्रिया अपनी प्रतिक्रया देने के लिए !


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