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"चाँद प्यारा लगता है "

Posted On: 20 Aug, 2015 Others,कविता,Hindi Sahitya में

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बादलों में छिपता
तारों  संग मुस्काता
चुपके से झाँकता
चाँद प्यारा  लगता .
..
खिड़की  से  झांकता
सारी  रात  जगाता
मन  में भाव  भरता
नयी  बात   बनाता
..
विरहन  को सताता
पी  संदेशा   पहुँचाता
परदेस    से    आता
मिलन की आस बँधाता
..
किसी  को    रुलाता
किसी  को    हँसाता
राज़  की  बात बोलता
जग  का भेद खोलता
..

मीनाक्षी श्रीवास्तव


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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Jitendra Mathur के द्वारा
February 17, 2016

सुंदर और मनभावन कविता मीनाक्षी जी । अभिनंदन ।

    meenakshi के द्वारा
    August 19, 2016

    जितेंद्र जी उपरोक्त पोस्ट पर आपने कमेंट्स दिए , आपका बहुत बहुत साभार !


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