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न जाने कौन ढूँढ़ेगा.....?

Posted On: 6 Jan, 2014 Others,कविता,Hindi Sahitya में

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न जाने कौन ढूँढ़ेगा…..


न जाने-जमाने को लगी कौन सी ऐसी हवा है,
क्यों अब किसी के लिये कोई भी नहीं सगा है .
..
न बदली में वो छटा है न हवा में वो सबा है .
न परवाने में वो दम है न शम्मा में वो फन है.
..
मन में कोई ज़ुबां में कोई फरियाद में कोई और है,
ख्वाब नहीं, हक़ीकत है यह, बस राज़ की बात है .
..
न शानो – शुबा माँ के ममता भरे आँचल की .
न बागवां – चमन का न आबो हवा वतन की .
..
न रौनक़ महफिलों में न मंज़िल मेहनतकशों की,
न जाने कौन ढूँढ़ेगा कोई दवा इस बदले ज़माने की !
..

मीनाक्षी श्रीवास्तव

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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

January 6, 2014

बहुत सुन्दर व् सार्थक अभिव्यक्ति .नव वर्ष २०१४ की हार्दिक शुभकामनायें .

    meenakshi के द्वारा
    January 7, 2014

    शालिनी कौशिक जी नववर्ष २०१४ आपको भी मंगलमय हो ! आपकी सार्थक टिप्पणी से रचना को ही नहीं मुझे भी बल मिला..हौसला बढ़ा है.बहुत -२ शुक्रिया .

DR. SHIKHA KAUSHIK के द्वारा
January 6, 2014

सार्थक प्रस्तुति हेतु बधाई .नव वर्ष के हार्दिक शुभकामनायें

    meenakshi के द्वारा
    January 7, 2014

    डॉ. शिखा कौशिक जी नववर्ष २०१४ आपको भी मंगलमय हो ! आपकी सार्थक टिप्पणी से न केवल रचना को बल्कि मुझे भी बल मिला..हौसला बढ़ा है.इस हौसला अफ़ज़ाई के लिए आपका बहुत -२ शुक्रिया .


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