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हाय ! नारी क्या तेरी है, यही कहानी ....

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हाय ! नारी  क्या तेरी  -
है, यही कहानी ।

युगों–युगों से आज तक -
है, लुटती अस्मिता तेरी ।

रिश्ते – नाते सारे- झूठे -
हैं, करते तुझसे बेईमानी ।

कोई न जाने कोई न माने –
है, तेरी  बेमिसाली ।

तेरे उद्गार तेरे समर्पण –
की है, लगती बोली ।

हे नारी ! आज नहीं पर कल से-
तेरी सच में बदलेगी कहानी !

दूर नहीं वो दिन अब ज्यादा ,
जब ज्योति – ज्वाला बनेगी  !

मीनाक्षी श्रीवास्तव

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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

alkargupta1 के द्वारा
December 11, 2013

मीनाक्षी जी , बहुत ही बढ़िया उदगार .नारी को आह्वाहन करती श्रेष्ठ कृति के लिएय बधाई

    meenakshi के द्वारा
    December 12, 2013

    अलका जी , आपकी – ” हाय ! नारी क्या…..” पर अपनी सार्थक और सराहनीय प्रतिक्रया देने के लिए मैं तहे दिल से आपकी आभारी हूँ .


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