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विजयादशमी एक विजयोत्सव पर्व " दशहरा "

Posted On: 24 Oct, 2012 Others में

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विजयोत्सव पर्व विजयादशमी –  ” दशहरा ” पर…..

इस महत्वपूर्ण पर्व का मुख्य उद्देश्य सभी लोगों की समझ में आ जाए तो इस पर्व की सार्थकता साबित हो ; तत्पश्चात  शायद इसका दुगना ही महत्व दिखाई देगा ….

यों तो हर व्यक्ति अपने आप को बुद्धिमान, समझदार, सज्जन एवं स्वयं को हर बुराई से निर्लिप्त समझता है पर काश ऐसा हो पाता …अर्थात यह सत्य नहीं है . सभी में कुछ न कुछ बुराई, अवगुण अथवा दोष होते हैं, कुछ सामान्य दोष जैसे -(क ) आलस्य …लापरवाही इत्यादि ।

कुछ लोगों को में बड़े ही भयंकर दोष होतें हैं जैसे- (ख) लोभ , अहंकार, दूसरों का अहित चाहना और करना तथा क्रोध – ये सब इतने बुरे दोष है जो किसी भी व्यक्ति को अपराधी प्रवृत्ति का बना देतें है . इन दोषों के कारण चाहे वह व्यक्ति कितना भी बुद्धिमान क्यों ना हो – यदि इनमें से एक भी भयंकर दोष उस पर समा गया तो समझिये कि उसका बेड़ा …ग़र्क …….

(ख) श्रेणी में आने वाले दोषों की चरमावस्था इंसान का आत्म-नियंत्रण ही नष्ट कर देता है .जिससे उसका पतन दिन-प्रति-दिन निकट आने लगता है . ” रावण ” का उदाहरण स्पष्ट है . जिसके पास स्वयं में दस सर अर्थात दस लोगों के दिमाग़ के बराबर दिमाग़ अथवा बुद्धि थी फिर भी उसका कैसा पतन हुआ ..? आज भी कोई उसका नाम लेना शुभ नहीं मानता है …क्यों ?

हमारे प्राचीन अनेक विद्वान् जनों ने और मनीषियों ने अनेक ऐसे ग्रंथों और महाकाव्यों की रचना की है – जिनमें अनेक प्रकार से जीवनोपदेश दिया है . बस आवश्यकता इस बात की है कि हम उसके गूढ़ अर्थों को समझ सकें .जिससे अपना तथा दूसरों का जीवन सुखी एवं खुशहाल बना सकें !

एक विशेष बात ..इस पर्व में अर्थात विजयादशमी के विजयोत्सव पर्व के उपलक्ष्य पर कहना चाहूंगी – हर इंसान सर्वप्रथम अपने भीतर के अन्दर के रावण को जलाए / नष्ट करें . अगर ऐसा हो सका तो पूरी दुनिया में कही कोई ” रावण ” नज़र नही आयेगा . जब जागो तब सवेरा इस वर्ष आज से ही ‘ जागने ‘ का प्रयास करें ! कोई देर नहीं हुई . परन्तु जागना तो होगा ..बिना जागे तो कुछ भी नहीं ….

आइये इस विजयादशमी विजयोत्सव पर्व को सार्थकता प्रदान करें ….!

” दशहरा ” के पर्व पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं !

मीनाक्षी श्रीवास्तव

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12 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

shashibhushan1959 के द्वारा
October 27, 2012

आदरणीय मीनाक्षी जी, सादर ! बहुत सुन्दर एवं अनुकरणीय विचार भरी रचना ! साथ में यह सन्देश… “आइये इस विजयादशमी विजयोत्सव पर्व को सार्थकता प्रदान करें ….!”" बहुत खूब !

    meenakshi के द्वारा
    October 27, 2012

    शशि भूषण जी, नमस्कार ! अपने सकारात्मक विचारों भरी प्रतिक्रया देने के लिए आपका हार्दिक शुक्रिया !

yamunapathak के द्वारा
October 25, 2012

MEENAKSHEE JEE आपने. bahut ही सुन्दर सन्देश दिया है साभार

    meenakshi के द्वारा
    October 27, 2012

    यमुना जी, शुक्रिया ! आपका बहुत-२ धन्यवाद अपने विचार देने के लिए .

kpsinghorai के द्वारा
October 24, 2012

मीनाक्षी जी, आपकी बात सही है कि दोष तो सबमें हैं और अगर हर व्यक्ति अपने ही दोषों को दूर करने का प्रण करते हुए उनको दूर करने लगे तब रावण दिखेंगे कैसे परंतु हो इसके उलट रहा है और इसीलिए समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। साभार……

    meenakshi के द्वारा
    October 25, 2012

    kpsingh जी, अपने विचार देने के लिए बहुत-२ धन्यवाद आपका !

vaidya surenderpal के द्वारा
October 24, 2012

मीनाक्षी जी नमस्कार, सुन्दर सन्देश देता आलेख । आपको विजयपर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ ।

    meenakshi के द्वारा
    October 24, 2012

    Vaidya जी, नमस्कार ! आपको बहुत-२ हार्दिक धन्यवाद एवं शुभकामनाओं सहित .

akraktale के द्वारा
October 24, 2012

मीनाक्षी जी              सादर, सर्वप्रथम आपको दशहरा पर्व कि शुभकामना. आप ने इंसान के बेडा गर्क करने वाले तत्वों पर जानकारी दी है. किन्तु मुझे लगता है कि क्रोध एक स्वाभाविक प्रवृत्ति है. हाँ क्रोध में आपा खोना अवश्य ही घातक हो सकता है. आजकल कि परिस्थिति को देखें तो लगता है. इंसान में लोभ,अहंकार और दूसरे का अहित चाहने कि भावना तो प्रबल है किन्तु उसे क्रोध नहीं आता.

    meenakshi के द्वारा
    October 24, 2012

    akraktale जी, सबसे पहले तो आपको भी सपरिवार ” दशहरा पर्व ” की शुभकामनाएँ ! हो सकता है ‘ क्रोध ‘ के बारे में आपका अपना नजरिया अलग हो …कोई बात नहीं ..पर आजकल जहाँ देखो वहां .. हर व्यक्ति ताव / क्रोध में नज़र आता है , क्या बच्चे क्या बड़े जरा सी बात सहन नहीं होती …आपे से बाहर..हो जाते दिखाई देते हैं . वैसे आपनी सकारात्मक और मार्गदर्शी प्रतिक्रिया देने के लिए – हार्दिक धन्यवाद .

shalini kaushik के द्वारा
October 24, 2012

बहुत सुन्दर व् सार्थक अभिव्यक्ति .आपको विजयदशमी पर्व की हार्दिक शुभकामनायें

    meenakshi के द्वारा
    October 24, 2012

    शालिनी जी , नमस्कार ! आपकी सकारात्मक प्रतिक्रिया पाकर , बहुत ख़ुशी हुई . आपको भी ” दशहरा ” की हार्दिक मंगल कामनाएँ ! शुक्रिया अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए.


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